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गुरराजसिंह विरक-एक किसान जिसने सारी बाधाओं को छोटा कर दिया

Posted On - 8 August, 2022
Category - Mitti Ke Sapne

मेहनत और लगन ये दो ऐसी चीज़ें है जो इंसान को अच्छा फल देकर ही जाती है। चलिए चलते है देश के कृषि प्रधान प्रदेशों में से एक पंजाब की ओर। पंजाब की धरती पर जन्म लेने वाले गुरराज सिंह को कहां पता था कि कृषि उन्हें तरक्की की नई ऊंचाइयों पर लेकर जाएगी । पूरे देश में जब कृषि का तरीका बदल रहा था तो नन्हा गुरराज अपने विद्यालय में पंजाबी की नई-नई कविताएँ सीख रहा था ।यह दौर हरित क्रांतिका था। अपने पिता को खेती करते देख नन्हा गुरराज सोचता था की बड़ा होकर वो भी अपने पिता की तरह एक किसान बनेगा । बारह साल के होते ही गुरराज सिंह को कृषि में बदलाव दिखाई देने शुरू हो गए। वक्त बीतने के साथ गुरराज भी बड़ा हुआ और बारहवीं तक की पढ़ाई पूरी की । पढ़ाई पूरी करने के बाद मात्र उन्नीस साल की उम्र में गुरराज ने बागबानी विश्वविद्यालय की मदद से कीनू के बाग लगाए । कीनू के बाग ने अभी फल देना शुरू ही किया था की गुरराज के पिता उनका साथ छोड़कर दुनिया से चले गए । जिन्होंने गुरराज की जीवन के हर मोड़ पर मदद की अब वे गुरराज से बहुत दूर थे । परेशानी की इस घड़ी में भी गुरराज सिंह डटकर हर चुनौतियों से लड़ते रहे। उन्होंने अपने पिता से सीखा था की वक्त चाहे जितनी भी तकलीफ दे पर हमे कभी अपने इरादे कमज़ोर नहीं करने चाहिए । उन्होंने खुद को और अपने परिवार को संभाला और दुगुने जोश के साथ खेती में लग गए । उन्होंने कीनू के अलावा रूई और गन्ने की खेती चालू की लेकिन बढ़ते कर्ज़ और कम मुनाफ़े की वजह से उन्हें वो खेती भी छोड़नी पड़ी। गुरराज सिंह ने फिर धान की खेती चालू की परंतु सिंचाई का इंतजाम ना होने के कारण उन्हें फिर से एक और फसल में नुकसान झेलना पड़ा और आखिर में उन्हें धान की खेती भी बंद करनी पड़ी। इन सब परेशानियों के बीच गुरराज सिंह की माँ भी उनका साथ छोड़कर इस दुनिया से चली गई । जिंदगी के कठिन पड़ाव में गुरराज सिंह ने कभी हार नहीं मानी और इसी जज़्बे ने उन्हें सफल बनाया । कुछ सालों बाद कीनू की बहुत अच्छी फसल हुई । उन्होंने इन पैसों से पानी और बिजली की व्यवस्था की और कठिन परिश्रम करके धान की खेती से लाभ कमाया । गुरराज हमेशा से खेती में कुछ बड़ा करना चाहते थे इसीलिए उन्होंने एक और फसल में अपना हाथ आजमाया । उन्होंने अंगूर की खेती की और अच्छा मुनाफ़ा कमाया । गुरराज मेहनती और होशियार होने के साथ-साथ तीव्र बुद्धि वाले भी थे । खेती में नई तकनीक का बहुत महत्व होता है । ये बात गुरराज को अच्छे से पता थी इसीलिए अपनी खेती को नए स्तर पर ले जाने के लिए उन्होंने एक ऐसा उपकरण बनाया जो हज़ार रुपए का काम मात्र डेढ़ सौ रुपए में ही कर देता था । उन्होंने एक ऐसा उपकरण भी बनाया जो बहुत ही आसानी से पेड़ को अच्छे आकार में ला सकता है । आज गुरराज सिंह कीनू के साथ-साथ धान , नींबू , संतरा , अनार , अमरूद, आंवला , जामुन , और चीकू जैसे फसलों की खेती भी करते है । अपनी सूझबूझ और खेती में नई तकनीक लाने की वजह से गुरराज सिंह को सर्वश्रेष्ठ कीनू किसान के पद से भी नवाजा गया । गुरराज पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के सलाहकार भी है और अपने जैसे अनेक किसानों की मदद भी करते है ।


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